मुक्तक
ज़िंदगी तेरे पास आख़िर नया क्या है,
पैदा होना ,जीना मरना और क्या है।
क्यों तुझे घुट -घुट के फ़िर इंसां जिए ,
मौत से ज्यादा यहाँ कुछ और क्या है।
ज़िंदगी के पास आख़िर और क्या है,
मौत के ही सिवा आख़िर राज़ क्या है।
क्यों न जोशो-जुनूँसे इसको जियें ,
हँसनेजीने जे बिना जीना भी क्या है॥
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