हो गम न जहां
हो गम न जहां ,सुख हो या हो दुख
एसा इक जग हो अपना ।
वो कल कभी तो आयेगा ही,
चाहे आज हो केवल सपना।
हम जियें जहां औरों के लिये,
कोई न पराया अपना हो।
दुनिया हो दुनिया की खातिर ,
बस प्यार ही सुन्दर सपना हो।
औरों की खुशी अपने सुख हों,
उनके दुख अपने दर्द बनें।
हो शत्रु न कोई मीत जहां,
सब ही सब के हमदर्द बनें।
हो झूठ न सच,सत और असत,
ना स्वर्ग -नरक की माया हो।
बस प्रीति की रीति हो उस जग में,
और प्यार की सब पर छाया हो।
हो गम न जहां.......................॥
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