saahityshyamसाहित्य श्याम

यह ब्लॉग खोजें

Powered By Blogger
परमार्थ मार्ग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परमार्थ मार्ग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 16 जून 2018

सच्चा सुख---- काव्यपथ-शान्तिपथ---डा श्याम गुप्त

                                    कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


---सच्चा सुख----
=================
काव्यपथ-शान्तिपथ
-------------------------

अब तक जगसुख रहा खोजता,
मन में थी इक चाह मचलती |
चाह यही थी प्रभु को खोजूं,
मैंने अपनी राह बदल दी ||

चलें काव्य के दुर्गम पथ पर,
यदि चाहें प्रभु मय जग पाना |
देश समाज राष्ट्र के हित में,
यदि परमार्थ मार्ग अपनाना |

अंतर्मन ब्रह्माण्ड है सारा,
मन मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा |
अंतर्मन की शान्ति मिले तो,
वह ही ईश्वर अल्लाह प्यारा |

अपने अंतर्मन की दुनिया,
जग को भाव समर्पण करदें |
ईर्ष्या द्वंद्व भाव इच्छाएं,
सब कुछ प्रभु को अर्पण करदें |

कलम उठी परमार्थ भाव हित,
मन तो प्रभु को किया समर्पित |
अधम भाव सब मुझसे लिपटें,
उत्तम सारे जग को अर्पित |

अंतर्मन के द्वंद्व-प्रीति सब,
बने भाव जब मन में उभरे |
गीत बने जग के सुख दुःख के,
मसि बन कर कागज़ पर उतरे |

प्रभु के गीत ढले मानस में ,
शान्ति मिली मन सरिता तीरे |
जैसे समतल शांत नदी में,
बहती तरणी धीरे धीरे ||