saahityshyamसाहित्य श्याम

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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

डा श्याम गुप्त की गज़ल......दीप खुशियों के....

कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


डा श्याम गुप्त की ग़ज़ल.....

दीप खुशियों के जलें एसे ।
पुष्प दामन में खिलें जैसे।

खूब रोशनी हो जीवन में,
सफलताएं सब मिलें जैसे।

आशा और उत्साह से पूरित ,
जीवन राह में चलें जैसे।

उमंगें व उल्लास के पौधे,
उर्वरा भूमि में फलें जैसे।

मुस्कुराइए जला कर दीये,
हम सामने हों खड़े जैसे।

खुश होलेना कि तरन्नुम में,
श्याम की ग़ज़ल सुनलें जैसे ॥

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