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शनिवार, 12 सितंबर 2009

त्रिपदा अगीत सप्तक ---डा श्याम गुप्ता

--त्रिपदा अगीत छंद , अतुकांत कविता की एक विधा 'अगीत' का एक छंद है ,जिसमें --१६-१६ मात्राओं की तीन पंक्तियाँ होती हैं परन्तु अन्त्यानुप्रास ( तुकांत ) होना आवश्यक नहीं। -----
(१)
अंधेरों की परवाह कोई,
करे दीप जलाता जाए;
राह भटके को जो दिखाए
()
सिद्धि -प्रसिद्धि सफलताएं हैं ,
जीवन में लाती हैं खुशियाँ;
पर सच्चा सुख यही नहीं है।
()
चमचों के मज़े देख हमने,
आस्था को किनारे कर दिया;
दिया क्यों जलाएं हमी भला।
()
जग में खुशियाँ हैं उनसे ही,
हसीं चेहरे खिलते फूल;
हंसते रहते गुलशन गुलशन।
()
यद्यपि मुश्किल सदा, बदलना ,
साथ वक्त के यदि चलेंगे ;
तो पिछडे ही रह जायेंगे।
()
खुश होकर फूँका उनका घर,
अपना घर भी बचा पाये;
चिंगारी उड़कर पहुँची थी।
()
बात क्या बागे-बहारों की,
बात हो चाँद-सितारों की;
बात बस तेरे इशारों की।।

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