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मंगलवार, 19 जनवरी 2010

डा श्याम गुप्त ---जब आये रितु राज बसन्त --

कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित ----

जब आये रितु राज बसन्त ॥

आशा त्रिष्णा प्यार जगाये,
विह्वल मन में उठे तरंग ।
मन में फ़ूले प्यार की सरसों,
अंग अंग भर उठे उमन्ग ॥

अन्ग अन्ग में रस भर जाये ,
तन मन में जादू कर जाये।
भोली-भाली गांव की गोरी,
प्रेम मगन राधा बन जाये ॥

कण कण में रितुराज समाये,
हर प्रेमी कान्हा बन जाये ।
रिषि-मुनि मन भी डोल उठें,जब-
बरसे रंग रस रूप अनन्त ॥

जब आये रितु राज बसन्त ॥

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