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सोमवार, 2 अगस्त 2010

डा श्याम गुप्त के त्रिपदा अगीत..

कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित--------
 त्रिपदा अगीत--१६-१६ मात्राओं के तीन पदों वाला अतुकान्त गीत है जो अगीत कविता का एक छंद है---


     १.
.अंधेरों की परवाह कोई,
  न करे, दीप जलाता जाए;
 राह भूले को जो दिखाए |
      २.
सिद्धि प्रसिद्धि सफलताएं हैं,
जीवन में लाती हैं खुशियाँ;
पर सच्चा सुख यही नहीं है|
      ३.
चमचों के मजे देख हमने ,
आस्था को किनारे रखदिया ;
दिया क्यों जलाएं हमीं भला|
     ४.
जग में खुशियाँ उनसे ही हैं,
हसीन चेहरे खिलते फूल;
हंसते रहते गुलशन गुलशन |
      ५.
मस्त हैं सब अपने ही घरों में ,
कौन गलियों की पुकार सुने;
दीप मंदिर में जले कैसे ?

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