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गुरुवार, 4 जुलाई 2013

" कुछ शायरी की बात होजाए"...से नज्म-१७- तेरे जाने से......

                                      कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित

            " कुछ शायरी की बात होजाए"...से  नज्म-१७ -    तेरे जाने से...... ..

                                     
                                

                                      

                                
                                   मेरी शीघ्र प्रकाश्य शायरी संग्रह....." कुछ शायरी की बात होजाए ".... से  ग़ज़ल, नज्में  , रुबाइयां, कते, शेर  आदि  इस ब्लॉग पर प्रकाशित किये जायंगे ......प्रस्तुत है......कुछ नज्में... नज़्म-१७ 

                  तेरे जाने से......

हम नहीं मुस्कुराए हें इक ज़माने से |
ऐसे  हालात  हुए  हैं  तेरे  जाने  से |

हंसते रोते भी रहे यूं तो जीने के लिए ,
दर्द सारे यूंही पीते रहे पीने के लिए |
गीत जीने के भी हमने सभी गाये हैं ,
मन में खुशियों के ढेरों  सुमन उगाये हैं |

यादे उलफत को भुलाया कई बहाने से ,
ऐसे  हालात  हुए  हैं  तेरे  जाने  से |

तन में कलियाँ भी खिलीं, मस्त हवाएं भी चलीं ,
तन के आकाश में वो मस्त हवाएं छाईं |
मन के पंछी ने भी हो मस्त लगाए फेरे,
दिल की गलियों में भी वो मस्त बहारें आयीं |

हर खुशी पायी है पायी है सभी ऊंचाई,
तुमको हर बार भुलाया है हर बहाने से |

 ऐसे  हालात  हुए  हैं  तेरे  जाने  से |
हम नहीं मुस्कुराए हें इक ज़माने से

2 टिप्‍पणियां:

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

वाह...लाजवाब रचना...बहुत बहुत बधाई.....

shyam Gupta ने कहा…

Thnx prasaann ji ...