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मंगलवार, 24 जुलाई 2012

परमार्थ ..प्रेम-काव्य--एकादश सुमनान्जलि- अमृतत्व--रचना-४ ..डा श्याम गुप्त..

                                            
                                         कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित
                                                             प्रेम  -- किसी एक तुला द्वारा नहीं तौला जा सकता, किसी एक नियम द्वारा नियमित नहीं किया जा सकता; वह एक विहंगम भाव है  | प्रस्तुत है-- इस काव्य-कृति की अंतिम व एकादश  सुमनान्जलि- अमृतत्व --जो मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य व सोपान है  वह प्रेम, भक्ति, कर्म , योग, ज्ञान   चाहे जिस  मार्ग से आगे बढे .. ----इस सुमनांजलि में...जीवन-सुख, शाश्वत-सुख, ज्ञानामृत, परमार्थ एवं मोक्षदा एकादश ....अदि पांच रचनाएँ प्रस्तुत की जायेंगी | प्रस्तुत है ..चतुर्थ  रचना 

                         ...परमार्थ ...        
        
       (श्याम सवैया छंद—६ पन्क्तियां )
प्रीति मिले सुख-रीति मिले, धन-प्रीति मिले, सब माया अजानी।
कर्म की, धर्म की ,भक्ति की सिद्धि-प्रसिद्धि मिले सब नीति सुजानी ।
ग्यान की कर्म की अर्थ की रीति,प्रतीति सरस्वति-लक्ष्मी की जानी ।
ऋद्धि मिली, सब सिद्धि मिलीं, बहु भांति मिली निधि वेद बखानी
सब आनन्द प्रतीति मिली, जग प्रीति मिली बहु भांति सुहानी
जीवन गति सुफ़ल सुगीत बनी, मन जानी, जग ने पहचानी


जब सिद्धि नहीं परमार्थ बने, नर सिद्धि-मगन अपने सुख भारी ।
वे सिद्धि-प्रसिद्धि हैं माया-भरम,नहिं शान्ति मिले,हैं विविध दुखकारी।
धन-पद का, ग्यान व धर्म का दम्भ,रहे मन निज़ सुख ही बलिहारी।
रहे मुक्ति के लक्ष्य से दूर वो नर,पथ-भ्रष्ट बने वह आत्म सुखारी ।
यह मुक्ति ही नर-जीवन का है लक्ष्य, रहे मन, चित्त आनंद बिहारी ।
परमार्थ के बिन नहिं मोक्ष मिले, नहिं परमानंद न कृष्ण मुरारी ।।

जो परमार्थ के भाव सहित, निज़ सिद्धि को जग के हेतु लगावें ।
धर्म की रीति और भक्ति की प्रीति,भरे मन कर्म के भाव सजावें ।
तजि सिद्धि-प्रसिद्धि बढें आगे, मन मुक्ति के पथ की ओर बढावें ।
योगी हैं, परमानंद मिले, परब्रह्म मिले, वे परम-पद पावें
चारि पदारथ पायं वही, निज़ जीवन लक्ष्य सफ़ल करि जावें
भव-मुक्ति यही, अमरत्व यही, ब्रह्मत्व यही, शुचि वेद बतावें ।|
      

3 टिप्‍पणियां:

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

शालिनी कौशिक ने कहा…

nice presentation.happy independence day.आजादी ,आन्दोलन और हम

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद संजू एवं शालिनी जी....