saahityshyamसाहित्य श्याम

VideoBar

यह सामग्री अभी तक एन्क्रिप्ट किए गए कनेक्शन पर उपलब्ध नहीं है.

यह ब्लॉग खोजें

Gadget

यह सामग्री अभी तक एन्क्रिप्ट किए गए कनेक्शन पर उपलब्ध नहीं है.

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

.श्रृंगार व प्रेम गीतों की शीघ्र प्रकाश्य कृति ......"तुम तुम और तुम".के गीत---९...गीत क्या होते है---- व गीत १०---पुरवा...डा श्याम गुप्त

                                कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


नूतन वर्ष में .मेरे ..श्रृंगार व प्रेम गीतों की शीघ्र प्रकाश्य कृति ......"तुम तुम और तुम". के गीतों को यहाँ पोस्ट किया जा रहा है -----प्रस्तुत है गीत---९...गीत क्या होते है---- व गीत १०---पुरवा...


गीत भला क्या होते है
बस एक कहानी है |
मन के सुख दुःख
अनुबंधों की,
कथा सुहानी है |
भीगे मन से
सच्चे मन की
कथा सुनानी है |
गीत भला क्या होते हैं
बस एक कहानी है ||
कहना चाहे ,
कह न सके मन ,
सुख दुःख के पल न्यारे |
बीते पल जब
देते दस्तक,
आकर मन के द्वारे |
खुशियों की मुस्कान औ,
गम के आंसू की गाथा के :
कागज़ पर
मन की स्याही से,
बनी निशानी है |
गीत भला क्या होते हैं
बस एक कहानी है ||
कुछ बोलें,
या चुप ही रहें :
मन में यह द्वंद्व समाया|
अंतर्द्वंदों की अंतस में,
बसी हुई जो छाया |
कागज़-कलम
जुगलबंदी की,
भाषा होते हैं |
अंतर की हाँ ना, हाँ ना की
व्यथा सुहानी है |
गीत भला क्या होते हैं
बस एक कहानी है ||
चित में जो-
गुमनाम ख़त लिखे ,
भेज नहीं पाए |
पाती भरी गागरी मन की,
छलक छलक जाए |
उमड़े भावों के निर्झर को
रोक नहीं पाए |
भाव बने शब्दों की माला,
रची कहानी है |
गीत भला क्या होते हैं
बस एक कहानी है ||



 गीत--10...
पुरवा

वह पुरवा की प्रथम लहर जब, कज़रारे घन नभ पर छाये |
सजनी के नयनों में भर भर, सावन मेघ छलक कर आये |

धरती धूल भरी सूखी से, बनी घास का हरा बिछौना |
सुस्त पडी गौरैया चहकी, उछल उछल दौड़े मृगछौना |
बौराए वन बाग बगीचे, मधुवन मधुवन मधुकर आये |
बदल लाये प्रेम संदेशा, धरती का आँचल लहराए |
मिली न प्रिय की पाती अब तक, मन की प्रीति छलेगी कब तक |
प्रेम प्रतीक्षा कब तक होगी, मन को धीर बंधेगी कब तक |
चींटी दल मुख में ले दाने, अपने घर को चले सजाने |
चौंच में तिनका लेकर पंछी, उड़ उड़ जाते नीड बसाने |
बैठी तरु की डाल सारिका, शुक से वाद-विवाद कर रही |
प्यारी सखी खड़ी हो छत पर, सखि से प्रिय की बात कर रही |
जिनको नहीं मिले संदेशे, सखियाँ मार रहीं हैं ताने |
कर सोलह श्रृंगार खडी हैं, जिन सखियों के साजन आये ||






,

कोई टिप्पणी नहीं: