साहित्य के नाम पर जाने क्या क्या लिखा जा रहा है रचनाकार चट्पटे, बिक्री योग्य, बाज़ारवाद के प्रभाव में कुछ भी लिख रहे हैं बिना यह देखे कि उसका समाज साहित्य कला , कविता पर क्या प्रभाव होगा। मूलतः कवि गण-विश्व सत्य, दिन मान बन चुके तथ्यों ( मील के पत्थर) को ध्यान में रखेबिना अपना भोगा हुआ लिखने में लगे हैं जो पूर्ण व सर्वकालिक सत्य नहीं होता। अतः साहित्य , पुरा संस्कृति व नवीनता के समन्वित भावों के प्राकट्य हेतु मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा। कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित......
शनिवार, 25 अप्रैल 2020
गुरुवार, 23 अप्रैल 2020
डा श्याम गुप्त का हीरक जयन्ती वर्ष अभिनन्दन ग्रन्थ -- अमृत कलश ---पुष्प- २-आशंसायें, शुभकामनाएं व उद्गार, व काव्यांजलि ---a.विद्वानों के उदगार--------डा श्याम गुप्त
कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित
डा श्याम गुप्त के अभिनन्दन ग्रन्थ 'अमृत कलश का लोकार्पण २२-०२-२०२० को हुआ |---तुरंत लौकडाउन के कारण कुछ विज्ञ लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है अतः --यहाँ इसे क्रमिक पोस्टों में प्रस्तुत किया जाएगा | प्रस्तुत है --
पुष्प- २-आशंसायें, शुभकामनाएं व उद्गार, व काव्यांजलि ---a.विद्वानों के उदगार----
1.प्रोफ. ओम प्रकाश पाण्डेय ----
२.
डा उषा सिन्हा ---
३.श्री महेश चन्द्र द्विवेदी ----
-----क्रमश ..
डा श्याम गुप्त के अभिनन्दन ग्रन्थ 'अमृत कलश का लोकार्पण २२-०२-२०२० को हुआ |---तुरंत लौकडाउन के कारण कुछ विज्ञ लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है अतः --यहाँ इसे क्रमिक पोस्टों में प्रस्तुत किया जाएगा | प्रस्तुत है --
पुष्प- २-आशंसायें, शुभकामनाएं व उद्गार, व काव्यांजलि ---a.विद्वानों के उदगार----
1.प्रोफ. ओम प्रकाश पाण्डेय ----
२.
डा उषा सिन्हा ---
३.श्री महेश चन्द्र द्विवेदी ----
-----क्रमश ..
मंगलवार, 21 अप्रैल 2020
डा श्याम गुप्त का हीरक जयन्ती वर्ष अभिनन्दन ग्रन्थ -- अमृत कलश --पुष्प १-अनुक्रम व सन्देश ------डा श्याम गुप्त
कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित
डा श्याम गुप्त के अभिनन्दन ग्रन्थ 'अमृत कलश का लोकार्पण २२-०२-२०२० को हुआ |---तुरंत लौकडाउन के कारण कुछ विज्ञ लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है अतः --यहाँ इसे क्रमिक पोस्टों में प्रस्तुत किया जाएगा | प्रस्तुत है ----अनुक्रम एवं सन्देश ---
अनुक्रम
---
वन्दना
पुष्प १.—सन्देश
पुष्प २. आशंसायें, शुभकामनाएं व उद्गार, व काव्यांजलि----
---a.कवि मित्रों की शुभकामनाएं /उदगार
--- b.मित्रों, सम्बन्धियों की शुभकामनाएं/ उदगार
---c.मनीषियों
व विद्वानों की आशंसायें
d. ---काव्यांजलि---
पुष्प ३.—डा श्याम गुप्तका व्यक्तित्व व परिचय सचित्र ---
पुष्प ४.--
“ सम्पूर्ण कृतित्व
संक्षेप में व रचनाधर्मिता ---
पुष्प ५.—आलेख----
पुष्प ६--डा श्याम गुप्त की विविध विधाओं व विषयों
सम्बंधित कुछ रचनाएँ..
पुष्प ७.—समीक्षाएं आदि ..
पुष्प ८.—चिट्ठी पत्री....
पुष्प ९.–.
मीडिया में...
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Dr Ram Kishan Gupta
M.B.B.S., DCP 98, vijay nagar colony Kanpur Road
Ex. Chief Medical Superintendent Lucknow-226023
N.R. Hospital, Charbagh, Lucknow
Regd. No. 11821 U.P. Med. Council
सन्देश
डा श्याम बाबू गुप्त के बाबत कुछ लिखना उसी प्रकार है जैसे सूर्य को दीपक दिखाना|वे हिन्दी भाषा के गहरे जानकार हैं|एक कुशल शल्य-चिकित्सक के साथ वे हिन्दी भाषा, साहित्य व भारतीय संस्कृति के प्रकांड पंडित भी हैं| मेरा उनसे घनिष्ठ संपर्क वर्ष १९८९ ई. से हुआ जब वे स्थानान्तरण होकर उत्तर रेलवे चिकित्सालय,लखनऊ में पदासीन हुए|तभी मुझे ज्ञात हुआ कि डा. श्याम बाबू गुप्ता एक विशेष प्रतिभा के स्वामी हैं|
वर्ष २००४ में वे भारतीय रेलवे सेवा सेवानिवृत्त हुए से| तदुपरांत उन्होंने अपना सारा जीवन हिन्दी भाषा व साहित्य के उत्थान में लगा दिया|उनके जीवन में रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है,उन्होंने अपने जीवन काल में अनेकों पुस्तकें लिखी हैं, विशेष रूप से उनकी रचना शूर्पणखा का वर्णन अद्वितीय है|
डा. श्यामबाबू गुप्त के अभिनंदन ग्रन्थ के प्रकाशन पर मुझे अत्यंत प्रसन्नता व गर्व है| उन्हें व उनके परिवार को शुभकामनाएं प्रेषित हैं |
डा.राम किशन गुप्ता
भूतपूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उत्तर रेलवे,लखनऊ
----------------------
Dr. (Mrs.) Chandra Gupta Flat No. P 601, Sector B, Celebrity Greens
MBBS, DA, MD Shushant Golf City, Shaheed Path,
Ex. Professor
Deptt. Of Anaesthesiology
K. G. Medical University
LUCKNOW Lucknow -226030.
शुभकामनाएं व सन्देश
यह अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय है कि श्री
डॉ. श्याम बाबू गुप्ता की रचनात्मक उपलब्धियों हेतु लखनऊ की ‘अगीत साहित्यिक व
सांस्कृतिक संस्था ‘ एवं ‘नवसृजन साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था,‘ अमृत-कलश,
अभिनंदन-ग्रन्थ प्रकाशित करने जा रही है |
डॉ. श्याम बाबू गुप्ता एक सौम्य एवं सरल
प्रकृति के व्यक्ति हैं तथा विशेष व्यक्तित्व के धनी हैं | डा. गुप्ता की रेलवे के
अपने सेवाकाल में ही लेखन में विशेष रूचि थी जिसे उन्होंने सेवानिवृत्ति के उपरांत
अपना लक्ष्य बना लिया और तभी से उनकी लेखनी निरंतर उनकी विचारधारा को वर्णित कर
रही है | डा.गुप्ता ने हिन्दी एवं ब्रजभाषा में अनेक काव्य संग्रहों के अतिरिक्त
विभिन्न रचनाएँ गद्य, पद्य एवं अन्य विधाओं में भी सृजित की हैं जिनका पूर्व में
प्रकाशन हो चुका है | उन्हें अनेकों संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है
|
हिन्दी साहित्य में इस ऊंचाई पर पहुँचने
के लिए डा. गुप्ता ने जो अथक प्रयास किये हैं वे अत्यंत सराहनीय हैं और इसके लिए
वे बधाई के पात्र हैं | इस अमृत-कलश, अभिनंदन ग्रन्थ के प्रकाशन के रूप में, मैं
डा.श्याम बाबू गुप्ता जी की विशिष्ट उपलब्धि हेतु मैं उन्हें हार्दिक बधाई
एवं शुभकामनाएं प्रेषित करती हूँ एवं भविष्य में भी निरंतर सफलता की कामना करती
हूँ | साथ ही मैं उपर्युक्त दोनों साहित्यिक संस्थाओं का आभार प्रकट करती हूँ
जिन्होंने श्री डा.श्यामबाबू गुप्ता जी को यह अवसर प्रदान किया |
स्नेह सहित
डा. चंद्रा
गुप्ता
_______________________________________________________________________________________________________
शनिवार, 18 अप्रैल 2020
डा श्याम गुप्त का हीरक जयन्ती वर्ष अभिनन्दन ग्रन्थ -- अमृत कलश --वन्दना व सम्पादकीय ---डा श्याम गुप्त
कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित
डा श्याम गुप्त के अभिनन्दन ग्रन्थ 'अमृत कलश का लोकार्पण २२-०२-२०२० को हुआ |---तुरंत लौकडाउन के कारण कुछ विज्ञ लोगों तक नहीं पहुँच पा रही है अतः --यहाँ इसे क्रमिक पोस्टों में प्रस्तुत किया जाएगा | प्रस्तुत है ----वैदिक सरस्वती वंदना व सम्पादकीय ---
वैदिक सरस्वती
वंदना
हे
माँ !तुम जब दिव्य रसों की,
दिव्य लोक से वर्षा करतीं ;
निर्मल, बुद्धि ,विवेक ,ज्ञान की,
सभी प्रेरणा मिलती जग को|
ज्ञान भाव से सकल विश्व को,
करें पल्लवित मातु शारदे |
दिव्य लोक से वर्षा करतीं ;
निर्मल, बुद्धि ,विवेक ,ज्ञान की,
सभी प्रेरणा मिलती जग को|
ज्ञान भाव से सकल विश्व को,
करें पल्लवित मातु शारदे |
ऋषियों ने माँ सप्त स्वरों से,
आदि ऊर्जा और स्वयंभू,
अनहद नाद से किया संगठित
जग कल्याण हेतु माँ वाणी!
बनी बैखरी, हुई अवतरित,
हो जाते मन भाव उत्तरित |
आदि ऊर्जा और स्वयंभू,
अनहद नाद से किया संगठित
जग कल्याण हेतु माँ वाणी!
बनी बैखरी, हुई अवतरित,
हो जाते मन भाव उत्तरित |
भाव स्वरों के श्रेष्ठ ज्ञान से,
तत्व ज्ञान के स्वर मिलते हैं |
फलित ज्ञान होजाता नर को,
तब हो पाता ज्योति-दीप सा |
ज्ञान ज्योति से ज्योति जल जग,
मिटे तमिस्रा, नव प्रभात हो |
तत्व ज्ञान के स्वर मिलते हैं |
फलित ज्ञान होजाता नर को,
तब हो पाता ज्योति-दीप सा |
ज्ञान ज्योति से ज्योति जल जग,
मिटे तमिस्रा, नव प्रभात हो |
सर्व ज्ञान सम्पन्न विविध नर,
सभी, एक से कब होते हैं |
अनुभव, तप, श्रृद्धा व भावना ,
होते सब के भिन्न भिन्न हैं |
भरे जलाशय, ऊपर समतल,
होते ऊंचे-नीचे तल में |
सभी, एक से कब होते हैं |
अनुभव, तप, श्रृद्धा व भावना ,
होते सब के भिन्न भिन्न हैं |
भरे जलाशय, ऊपर समतल,
होते ऊंचे-नीचे तल में |
केवल बुद्धि ज्ञान क्षमता से ,
गूढ़ ज्ञान के अर्थ न मिलते;
गूढ़ ज्ञान के तत्व प्राप्तु हित,
निर्मल मन, तप,योग चाहिए |
उसी साधना रत सुपात्र को,
गूढ़ ज्ञान का तत्व मिला है|
गूढ़ ज्ञान के अर्थ न मिलते;
गूढ़ ज्ञान के तत्व प्राप्तु हित,
निर्मल मन, तप,योग चाहिए |
उसी साधना रत सुपात्र को,
गूढ़ ज्ञान का तत्व मिला है|
माँ की कृपा नहीं होती है,
भक्ति भाव भी उर न उमंगते ;
श्रृद्धा और स्नेह भाव भी,
उस मानस में नही उभरता |
भक्ति भाव उर बसे हे माता!
चरणों का मराल बन पाऊँ |
सम्पादकीय ---- डा योगेश
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------क्रमश -----अगले अंक में --
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