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रविवार, 21 अप्रैल 2013

कुछ शायरी की बात होजाए ...ईश प्रार्थना ....डा श्याम गुप्त .....

                                     कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


             मेरी शीघ्र प्रकाश्य शायरी संग्रह....." कुछ शायरी की बात होजाए ".... से  ग़ज़ल, नज्में  इस ब्लॉग पर प्रकाशित की जायंगी ......प्रस्तुत है प्रथम रचना .....

        ईश प्रार्थना --ग़ज़ल में ....

ईश अपने भक्त पर, इतनी कृपा कर दीजिये |
रमे तन मन राष्ट्र हित में, प्रभो ! यह वर दीजिये |

प्रेम करुणा प्राणिसेवा, भाव नर के उर बसें ,
दया ममता सत्य से युत, भाव मन धर  दीजिये |

सहज भक्ति से  आपकी,  मानव करे नित वन्दना ,
हो प्रेममार्ग प्रशस्त जग में, प्रीति  लय सुर दीजिये |

मैं न मंदिर में गया, प्रतिमा तुम्हारी पूजने,
भाव हो पत्थर नहीं, यह भाव जग भर दीजिये |

पाप पंक में इस जगत के, डूबकर भूला तुम्हें ,
याद करके स्वयं  मुझको, भक्ति के स्वर दीजिये |

दूर से आया तुम्हारी शंख-ध्वनि का नाद सुन ,
नाद अनहद मधुर स्वर से, भर प्रभो! उर दीजिये |

राह आधी अगया हूँ, अब चला जाता नहीं ,
हो कृपासागर तो दर्शन यहीं आकर दीजिये |

हे दयामय! दयासागर! प्रभु दया के धाम हो ,
श्याम के ह्रदय में बस कर, पूर्ण व्रत कर दीजिये ||

 

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