saahityshyamसाहित्य श्याम

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रविवार, 12 मई 2013

" कुछ शायरी की बात होजाए "....ग़ज़ल - १२. त्रिपदा-अगीत ग़ज़ल........ डा श्याम गुप्त ....

                                          
    " कुछ शायरी की बात होजाए".....      डा श्याम गुप्त .               

                                 
                                                कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


             मेरी शीघ्र प्रकाश्य शायरी संग्रह....." कुछ शायरी की बात होजाए ".... से  ग़ज़ल, नज्में  इस ब्लॉग पर प्रकाशित की जायंगी ......प्रस्तुत है....ग़ज़ल-१२ ...त्रिपदा -अगीत ग़ज़ल.....पागल दिल...



            पागल दिल

क्यों पागल दिल हर पल उलझे ,
जाने क्यों किस जिद में उलझे ;
सुलझे कभी, कभी फिर उलझे।

तरह- तरह  से  समझा देखा ,
पर दिल है  उलझा  जाता है ;
क्यों  ऐसे पागल से  उलझे।

धडकन बढती जाती दिल की,
कहता  बातें किस्म किस्म की ;
ज्यों काँटों में आँचल उलझे  ।।                        

 


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