saahityshyamसाहित्य श्याम

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मंगलवार, 7 मई 2013

" कुछ शायरी की बात होजाए "....ग़ज़ल - ११. त्रिपदा ग़ज़ल........ डा श्याम गुप्त ....

                                          
                                           
                                         

                                 
                                                कविता की भाव-गुणवत्ता के लिए समर्पित


             मेरी शीघ्र प्रकाश्य शायरी संग्रह....." कुछ शायरी की बात होजाए ".... से  ग़ज़ल, नज्में  इस ब्लॉग पर प्रकाशित की जायंगी ......प्रस्तुत है....ग़ज़ल-११ ...त्रिपदा ग़ज़ल.....

यादों के ज़जीरे उग आए हैं-
गम के समंदर में ,
कश्ती कहाँ कहाँ ले जाएँ हम |

दर्दे-दिल उभर आये हैं जख्म बने-
तन की वादियों में,
मरहमे इश्क कहाँ तक लगाएं हम |

तनहाई के मंज़र बिछ गए हैं -
मखमली दूब बनकर,
बहारे हुश्न कहाँ तक लायें हम |

रोशनी की लौ कोई दिखती नहीं -
इस अमां की रात में,
सदायें कहाँ तक बिखराएँ हम |

वस्ल की उम्मीद ही नहीं रही 'श्याम 
पयामे इश्क सुनकर,
दुआएं कहाँ तक अब गायें हम ||
 



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