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बुधवार, 27 मई 2009

कहानी हमारी -तुम्हारी


ये दुनिया हमारी सुहानी न होती ,कहानी ये अपनी कहानी न होती ।
ज़मीं चाँद -तारे सुहाने न होते ,जो प्रिय तुम न होते ,अगर तुम न होते।
न ये प्यार होता ,ये इकरार होता ,न साजन की गलियाँ ,न सुखसार होता।
ये रस्में न क़समें ,कहानी न होतीं ,ज़माने की सारी रवानी न होती ।
हमारी सफलता की सारी कहानी ,तेरे प्रेम की नीति की सब निशानी ।
ये सुंदर कथाएं फ़साने न होते ,सजनी! तुम न होते,जो सखि!तुम न होते ।
तुम्हारी प्रशस्ति जो जग ने बखानी,कि तुम प्यार-ममता की मूरत,निशानी ।
ये अहसान तेरा सारे जहाँ पर , तेरे त्याग -द्रढता की सारी कहानी ।
ज़रा सोचलो कैसे परवान चढ़ते,हमीं जब न होते ,जो यदि हम न होते।
हमीं हैं तो तुम हो सारा जहाँ है , जो तुम हो तो हम है, सारा जहाँ है।
अगर हम न लिखते ,अगर हम न कहते ,भला गीत कैसे तुम्हारे ये बनते।
किसे रोकते तुम, किसे टोकते तुम ,ये इसरार इनकार ,तुम कैसे करते ।
कहानी हमारी -तुम्हारी न होती ,न ये गीत होते, न संगीत होता।
सुमुखि !तुम अगर जो हमारे न होते,सजनि!जो अगर हम तुम्हारे न होते॥

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