saahityshyamसाहित्य श्याम

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शनिवार, 30 मई 2009

जल बरसत -एक अमात्रिक घनाक्षरी छन्द--डमरू

पवन बहन लग, सर सर सर सर,
जल बरसत जस झरत सरस रस ।
लहर लहर नद , जलद गरज नभ,
तन मन गद गद ,उर छलकत रस ।
जल थल चर सब जग हलचल कर,
जल थल नभ चर ,मन मनमथ वश।
सजन लसत,धन ,न न न करत पर,
मन मन तरसत ,नयनन मद बस ॥

1 टिप्पणी:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

ajab!
gazab!
saras!